श्रीनृसिंहविज्ञापनम्

प्रकाशकीय
श्रीनृसिंहविज्ञापन एक पद्यात्मिका रचना है जो श्रीनृसिंहाश्रम के द्वारा प्रकट हुइ है ।
यह ग्रन्थ श्रीनृसिंह की परब्रह्मत्वेन वन्दना करता हुआ प्रारम्भ होता है । उसके बाद ग्रन्थकार कहते हैं कि वह किसी भी ऐसे व्यक्ति को ढूँढ नहीं पा रहे हैं जो उनके ज्ञान की परीक्षा कर सके , अतः श्रीनृसिंह भगवान् को ही परीक्षक बनाकर सुनाते हैं ।

यह ग्रन्थ वाराणसी से १९३४ में अद्वैतसिद्धान्तविद्योतन के परिशिष्ट के रूप में छप चुका है । प्रकाशक था राजकीय संस्कृत महाविद्यालय । इसके सम्पादक पण्डित श्री सूर्यनारायण शुक्ल जी थे ।
इस ग्रन्थ का सम्पादन पुनः श्रीमल्ललितालालितः के द्वारा किया गया । उन्होंने इस ग्रन्थ को अपने जालस्थल पर धारावाहिक के रूप में प्रकाशित भी किया ।
चूँकि ललितालालितः किसी भी अन्य पाण्डुलिपि को प्राप्त न कर सके , अतः यह संस्करण पूर्णतया प्रकाशित संस्करण पर आधारित है । उन्होंने पाठ को सुधारने का यथासम्भव प्रयास किया है ।
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